जब भी किसी इलाके में तनाव, झगड़े या हिंसा की आशंका होती है, तो प्रशासन सबसे पहले जिस कानूनी हथियार का इस्तेमाल करता है, वह है धारा 144 (Act 144)। ज़मीन विवाद से लेकर राजनीतिक तनाव तक, यह धारा सबसे ज्यादा लागू की जाती है। लेकिन आम आदमी के मन में सवाल रहता है कि धारा 144 होती क्या है, जमीन विवाद में यह कैसे लगती है और इसे हटाया कैसे जाता है?
धारा 144 (Section 144) क्या है?
धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) — जो पहले CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता) थी — की एक आपातकालीन धारा है। इसका उद्देश्य किसी भी इलाके में:
- ✅ हिंसा को रोकना
- ✅ भीड़ जमा होने से बचाना
- ✅ कानून-व्यवस्था बनाए रखना
इस धारा के तहत:
- 4 या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक
- हथियार, लाठी, डंडा, पत्थर लेकर चलने पर पाबंदी
- धरना, जुलूस, प्रदर्शन पर रोक
- कई बार इंटरनेट बंदी भी इसी के तहत की जाती है
जमीन विवाद में धारा 144 कैसे लगती है?
भारत में जमीन विवाद सबसे आम और खतरनाक विवादों में से एक होता है। जब प्रशासन को लगता है कि:
- दो पक्षों के बीच झगड़ा हिंसा में बदल सकता है
- कब्जा करने को लेकर तनाव बढ़ रहा है
- फसल काटने, निर्माण या रास्ते को लेकर टकराव हो सकता है
तब DM या SDM धारा 144 लागू कर देते हैं।
इस दौरान:
- दोनों पक्षों को मौके पर जाने से रोका जा सकता है
- जमीन पर किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि रुक जाती है
- फसल काटने या कब्जा बदलने पर प्रशासन रोक लगा देता है
इसका मकसद होता है कि कोई एक पक्ष जबरन कब्जा न कर सके और मामला कोर्ट के फैसले तक शांत रहे।
धारा 144 कितने दिन के लिए लगती है?
- सामान्य तौर पर 2 महीने (60 दिन) के लिए लगती है
- विशेष स्थिति में इसे स्टेट गवर्नमेंट 6 महीने तक बढ़ा सकती है
धारा 144 कैसे हटती है?
धारा 144 हटाने के तीन मुख्य तरीके होते हैं:
1️⃣ प्रशासन खुद हटाए
जब स्थिति सामान्य हो जाती है और हिंसा का खतरा खत्म हो जाता है, तो DM/SDM अपने आदेश से धारा 144 हटा सकते हैं।
2️⃣ कोर्ट के आदेश से
अगर किसी पक्ष को लगता है कि धारा 144 गलत तरीके से लगाई गई है, तो वह:
- हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है
- कोर्ट अगर पाता है कि खतरा नहीं है, तो 144 को रद्द करने का आदेश दे सकता है
3️⃣ समय पूरा होने पर
अगर 60 दिन पूरे हो जाते हैं और प्रशासन नए सिरे से आदेश जारी नहीं करता, तो धारा 144 अपने आप समाप्त हो जाती है।
धारा 144 तोड़ने पर क्या सज़ा होती है?
अगर कोई व्यक्ति धारा 144 का उल्लंघन करता है, तो:
- जुर्माना
- जेल (3 महीने तक)
- या दोनों सज़ा हो सकती है
यह केस IPC की धारा 188 (अब BNSS के तहत) में दर्ज होता है।
जमीन विवाद में 144 लगने का असली मतलब क्या होता है?
✅ यह किसी भी पक्ष के हक या मालिकाना हक का फैसला नहीं होती
✅ यह सिर्फ अस्थायी शांति बनाए रखने का आदेश होता है
✅ इसका मतलब यह नहीं कि जमीन किसी एक की हो गई
✅ असली फैसला कोर्ट करता है, प्रशासन नहीं
निष्कर्ष (Conclusion)
धारा 144 कोई सज़ा नहीं, बल्कि शांति बनाए रखने का एक अस्थायी प्रशासनिक कदम है। खासकर जमीन विवाद में इसका इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि मामला कानून के दायरे में रहे और कोई भी पक्ष जबरन ताकत के बल पर कब्जा न कर सके।
अगर आपको किसी जमीन विवाद में धारा 144 लगी है, तो घबराने की जरूरत नहीं—कानूनी रास्ते खुले रहते हैं।





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