भारत में अपराधों की श्रेणी में हत्या की कोशिश (Attempt to Murder) को सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है। अगर किसी व्यक्ति पर इस नीयत से हमला किया जाए कि उसकी जान चली जाए, लेकिन किसी वजह से उसकी मौत न हो, तो भी कानून उसे मामूली अपराध नहीं मानता। ऐसे मामलों में आरोपी पर सख्त धाराएं लगती हैं और लंबी सजा का प्रावधान है।
इस खबर में हम विस्तार से समझेंगे कि हत्या की कोशिश का कौन-सा एक्ट लगता है, नया कानून क्या कहता है, सजा कितनी है, किन हालात में यह धारा लगती है और किन मामलों में नहीं।
हत्या की कोशिश किसे कहते हैं?
कानून की नजर में हत्या की कोशिश वह स्थिति है, जब—
- किसी व्यक्ति पर हमला जान से मारने की नीयत से किया गया हो
- हमला इतना गंभीर हो कि उससे मौत हो सकती थी
- लेकिन संयोग, समय पर इलाज या बचाव के कारण व्यक्ति की जान बच जाए
यहां सबसे अहम शब्द है “नीयत (Intention)”।
अगर नीयत जान लेने की थी, तो भले ही मौत न हो, अपराध हत्या की कोशिश ही माना जाएगा।
हत्या की कोशिश में कौन-सी धारा लगती है?
🔹 पुराना कानून (IPC – भारतीय दंड संहिता)
- धारा 307 IPC – हत्या की कोशिश
🔹 नया कानून (BNS – भारतीय न्याय संहिता, 2023)
- धारा 109 BNS – हत्या की कोशिश
1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS लागू हो चुका है।
अब नए मामलों में पुलिस धारा 109 BNS के तहत एफआईआर दर्ज करती है।
हालांकि आम बोलचाल और पुराने मामलों में अब भी लोग इसे धारा 307 के नाम से जानते हैं।
धारा 109 BNS / 307 IPC में क्या-क्या शामिल है?
किसी मामले में हत्या की कोशिश की धारा तब लगती है, जब—
- घातक हथियार का इस्तेमाल
- गोली, पिस्टल, रिवॉल्वर
- चाकू, तलवार, फरसा
- बम, तेजाब, लोहे की रॉड
- शरीर के संवेदनशील अंग पर हमला
- सिर
- सीना
- पेट
- गर्दन
- घटना की परिस्थितियां
- पुरानी दुश्मनी
- धमकी देकर हमला
- अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया वार
- मेडिकल रिपोर्ट
- गंभीर चोट
- जान को खतरा
- डॉक्टर की राय कि “मौत हो सकती थी”
जरूरी नहीं कि हथियार चला ही हो,
अगर ट्रिगर दबा लेकिन गोली नहीं चली, तब भी धारा 109 BNS लग सकती है।
हत्या की कोशिश में सजा का क्या प्रावधान है?
🔴 सामान्य मामलों में
- 10 साल तक की सजा
- या आजीवन कारावास
- साथ में जुर्माना
🔴 अगर पीड़ित को गंभीर चोट आई हो
- आजीवन कारावास तक की सजा
- कोर्ट जुर्माना अनिवार्य कर सकती है
🔴 अगर आरोपी पहले से उम्रकैद की सजा काट रहा हो
- मौत की सजा तक का प्रावधान
यानी, हत्या की कोशिश की सजा कई बार हत्या से कम नहीं होती।
हत्या की कोशिश और मारपीट में फर्क
कई मामलों में सबसे बड़ा विवाद यही होता है कि
यह हत्या की कोशिश है या साधारण मारपीट?
| बिंदु | हत्या की कोशिश | मारपीट |
|---|---|---|
| नीयत | जान लेने की | चोट पहुंचाने की |
| धारा | 109 BNS / 307 IPC | 323, 324, 325 |
| हथियार | घातक | सामान्य |
| सजा | 10 साल से उम्रकैद | कम सजा |
अगर नीयत साबित नहीं होती, तो कोर्ट अक्सर धारा बदल देती है।
क्या हर गंभीर चोट में 109 BNS लगती है?
नहीं।
सिर्फ गंभीर चोट होना काफी नहीं है। कोर्ट यह देखती है—
- हमला क्यों किया गया?
- किस हथियार से किया गया?
- वार कितनी बार हुआ?
- आरोपी का व्यवहार क्या था?
अगर झगड़ा अचानक हुआ और जान लेने की मंशा साबित नहीं होती, तो मामला मारपीट में भी बदल सकता है।
पुलिस और कोर्ट किन बातों पर फैसला करती है?
- मेडिकल रिपोर्ट
- एफएसएल रिपोर्ट
- चश्मदीद गवाह
- सीसीटीवी फुटेज
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड
- आरोपी और पीड़ित का आपराधिक इतिहास
हत्या की कोशिश: जमानत मिलती है या नहीं?
- धारा 109 BNS / 307 IPC गंभीर और गैर-जमानती धारा है
- जमानत कोर्ट के विवेक पर निर्भर करती है
- चोट की गंभीरता और नीयत पर फैसला होता है
निष्कर्ष
हत्या की कोशिश कोई मामूली अपराध नहीं है।
अगर यह साबित हो गया कि हमला जान से मारने की नीयत से किया गया था, तो आरोपी को 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
कानून का मकसद साफ है—
अपराध रोकना और समाज में डर पैदा करना, ताकि कोई जान लेने की कोशिश करने से पहले सौ बार सोचे।





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